Saturday, April 9, 2011

बाबू समझो इशारे, अन्ना पुकारे पम पम पम, यहाँ नेता तो यारो, बेशर्म हैं सारे पम पम पम पब्लिक करप्सन के मारे, दुखी है प्यारे पम पम पम अब आ जाओ सारे, करप्सन को मारें पम पम पम बाबू समझो इशारे, अन्ना पुकारे पम पम पम -अजीत

Monday, March 28, 2011

मैं नेकियाँ करता हूँ और दरिया में डाल देता हूँ एक रोज़ जब ये दरिया भर जाएगा तो क्या करूँगा ??? अजीत

Wednesday, March 16, 2011

मौत तू एक कविता है

मौत तू एक कविता है
मुझसे एक कविता का वादा है मिलेगी मुझको
डूबती नज्मों में जब दर्द को नींद आने लगे
जर्द सा चेहरा लिए जब चाँद उफक तक पहुंचे
दिन अभी पानी में हो, रात किनारे के करीब
ना अँधेरा ना उजाला हो, ना अभी रात ना दिन
जिस्म जब ख़त्म हो और रूह को जब सांस आये
मुझसे एक कविता का वादा है मिलेगी मुझको
(इस कविता को फिल्म आनंद में डॉक्टर भास्कर बनर्जी नाम के किरदार के लिए गुलज़ार साहेब ने लिखा था। ये किरदार अमिताभ बच्चन ने निभाया था.)

Tuesday, March 8, 2011

दिल में जितने थे अरमान ले गए,
कश्तियाँ अपने संग तूफ़ान ले गए
मुझे दोस्तों ने कत्ल किया था,
दुश्मन मुझे श्मसान ले गए
आइने का सामना करूँ भी तो कैसे,
वो मुझसे मेरी पहचान ले गए
ओरत के जिस्म को साड़ी में लपेटा जिन्होंने,
बाज़ार तक उसे वाही कद्रदान ले गए
-अजीत धनखर

Tuesday, January 18, 2011

चूड़ियां

मैंने चूड़ियां खरीदी हैं तुम्हारे लिए
मेहरून और सुनहेरे रंग की
भाई साहेब, ये हर लिबास पे जचेंगी
यही कहा था बेचने वाले ने
या तो उसे चूड़ियां बेचनी थी या
वो मुझे बहला रहा था
खैर, मुझे तो पसंद आई
शायद तुम्हे भी आएँगी
जब ये तेरी की कैदी बन जाएँगी
मेरे प्यार की कीमत वसूल हो jayegi

Thursday, July 29, 2010

चाँद अलफ़ाज़

हर जगह जाहिर है हर जगह हाज़िर है,
खुदा हर इल्म का माहिर है
रख के जेब में दुनिया घूमता है,
वक़्त एक मनचला मुसाफिर है

Saturday, January 23, 2010

मौसम के अलबेले दिन

कभी मद्धम चमकीले दिन
शबनम कभी शोले दिन
गर्मी की शरबत में घुल के
मानो खुद को भूले दिन
बारिश में बिस्तर पर लेटे
कुछ सूखे कुछ गीले दिन
सर्द हवा में अलाव सेंकते
सर्दी के अलबेले दिन
नई शाख पर जा कर अटके
बसंत के नर्म रुपहले दिन
मुझको कितने अपने लगते
मौसम के मुह्बोले दिन
अजीत